पहली बार देखने पर जगह एकदम सही लग सकती है। अच्छी सड़क, अच्छा सामने का हिस्सा, ठीक किराया। पर किचन को बहुत बिजली और पानी चाहिए। अगर जगह इतना नहीं दे पाती, तो यह बाद में पता चलता है, और इसमें समय और पैसा दोनों जाते हैं।
पूजा ने एक छोटे कैफ़े के लिए जगह साइन की। हफ़्तों तक काम चला। नया काउंटर, नई लाइटें, दो ओवन और AC। पहले ट्रायल वाले दिन बिजली बार बार जाने लगी। उसके इलेक्ट्रीशियन ने बिल देखा। कनेक्शन उसके ओवन और AC के लिए छोटा था। उसे बिजली कंपनी से लोड बढ़वाना पड़ा। इसमें कई हफ़्ते लगे, और खर्च सोचे से ज़्यादा हुआ। कैफ़े तैयार था, पर बंद पड़ा था। किराया हर महीने जा रहा था।
जिस दिन उसने जगह देखी, इनमें से कुछ भी नज़र नहीं आया।
कैफ़े या रेस्टोरेंट खोल रहे हैं? साइन करने से पहले पता जाँचिए। Viabe Location Check एक पते के लिए आसपास की दुकानें, भीड़, सही किराया और साफ़ फ़ैसला दिखाता है। पूरी रिपोर्ट ₹2,999 + GST। *रिपोर्ट अंग्रेज़ी में मिलती है।*
साइन करने से पहले ये आसान जाँच कीजिए
1. बिजली का पिछला बिल माँगिए। उसमें मंज़ूर लोड (sanctioned load) देखिए। यह kW में लिखा होता है। इससे पता चलता है कि जगह कितनी बिजली इस्तेमाल कर सकती है।
2. अपने किचन की ज़रूरत जोड़िए। ओवन, फ़्रिज, कॉफ़ी मशीन, फ़्रायर, AC, पंखे और लाइटें, सबकी लिस्ट बनाइए। किसी इलेक्ट्रीशियन से कुल लोड जुड़वाइए। फिर बिल से मिलाइए। अगर किचन को ज़्यादा चाहिए, तो लोड बढ़वाना पड़ेगा।
3. देखिए कनेक्शन कमर्शियल है या नहीं। खाने के कारोबार वाली दुकान को आमतौर पर कमर्शियल कनेक्शन चाहिए। कुछ जगहें अब भी घर वाले कनेक्शन पर चलती हैं। मालिक से पूछिए, और बिल पर देखिए।
4. पूछिए लोड बढ़ाने का खर्च कौन देगा, और कितना समय लगेगा। बिजली कंपनी फ़ॉर्म, जाँच और कभी नई वायरिंग या नया मीटर माँग सकती है। नियम और खर्च हर शहर में अलग होते हैं। अपने इलाके के बिजली दफ़्तर में फ़ोन कीजिए, या इलेक्ट्रीशियन से पूछिए कि वहाँ आमतौर पर क्या होता है।
5. पानी जाँचिए। पूछिए दिन में कितने घंटे पानी आता है। टंकी का साइज़ देखिए। जो कैफ़े दिन भर कप धोता है, उसे बहुत पानी चाहिए। अगर पानी कम है, तो टैंकर मँगाने पड़ सकते हैं, और यह हर महीने का खर्च है।
6. नाली जाँचिए। किचन से रोज़ तेल वाला पानी निकलता है। पूछिए नाली कहाँ जाती है। देखिए कहीं नाली रुकी हुई या धीमी तो नहीं। पूछिए बिल्डिंग में किचन की इजाज़त है या नहीं।
7. गैस जाँचिए। क्या गैस की लाइन है? अगर नहीं, तो क्या सिलेंडर रखने की सुरक्षित जगह है, जहाँ हवा आती हो और जो बैठने की जगह से दूर हो? मालिक से पूछिए कि बिल्डिंग और लोकल नियम क्या इजाज़त देते हैं।
इसे लीज़ में लिखवाइए
सिर्फ़ बात काफ़ी नहीं है। ये बातें लीज़ में लिखवाइए:
- खर्च कौन देगा। लोड बढ़ाना, नई वायरिंग, पानी की टंकी और नाली का काम।
- काम कब तक होगा।
- बाहर निकलने का रास्ता। अगर बिजली कंपनी लोड बढ़ाने से मना कर दे, या बहुत देर हो, तो आप बिना डिपॉज़िट गँवाए जगह छोड़ सकें।
- किराया कब से शुरू होगा। कुछ मालिक बिजली तैयार होने के बाद किराया शुरू करने को मान जाते हैं। पूछिए।
सही शब्दों के लिए किसी वकील की मदद ले सकते हैं। लंबी लीज़ के सामने यह छोटा खर्च है।
यह क्यों ज़रूरी है
जितने हफ़्ते आपका कैफ़े तैयार होकर भी बंद रहता है, किराया जाता है और कमाई नहीं आती। आपके आने वाले ग्राहक इंतज़ार नहीं करते। वे पास का कोई और कैफ़े ढूँढ लेते हैं और वहीं जाने की आदत बना लेते हैं। साइन करने से पहले कुछ फ़ोन और बिल पर एक नज़र, आपको इससे बचा सकती है।
बिजली और पानी बताते हैं कि जगह चल पाएगी या नहीं। पता बताता है कि लोग आएँगे या नहीं।
साइन करने से पहले पता जाँचें। Viabe Location Check एक पते को देखता है: आसपास की दुकानें, भीड़, सही किराया, रिस्क और साफ़ फ़ैसला। अपनी लोकेशन जाँचें। पूरी रिपोर्ट ₹2,999 + GST।
*रिपोर्ट अंग्रेज़ी में मिलती है।*

